Importance of friend and friendship
दोस्त!हमारे जीवन का एक ऐसा सक्स है।हम सब के जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है दोस्त। जरूरी नहीं कि हम हजारों दोस्त रखें।बल्कि जरूरी यह है कि एक ही दोस्त हो और वह उन हजारों दोस्तों के बराबर हो।कई बार हम अधिक से अधिक दोस्त बनाते हैं। हम लगता है कि जिस दिन हमें किसी भी चीज का जरूरत होगा या कोई भी काम किसी भी प्रकार की मदद की आवश्यकता होगी तो वह मेरा मदद करेगा लेकिन कोई जरूरी नहीं है,कि ऐसा ही हो एक दोस्त ही रखो जो सैकड़ों, हजारों,लाखों बल्कि करोड़ों में एक हो।जो आपके लिए कुछ भी कर सकता हो।जो आपके बोलने के पहले आपकी मन की बात को जान ले।उसके लिए भी आप ही उसके सच्चे दोस्त होने चाहिए। ऐसा नहीं की आप उसको अपना सच्चा दोस्त मानते हो।लेकिन उसका कोई और हो।कोई जरूरी नहीं कि वह पढ़ने में काफी तेज हो।जरूरी यह है कि वह अपनी दोस्ती इमानदारी से निभा रहा हो। भले ही वह कोई गलत काम करता हो।लेकिन आपको उस काम करने से रोके आप को समझाएं की,यह काम गलत है। क्योंकि वह उस काम को कर रहा है।तो वह उस उसके बारे में अधिक जानता होगा।जिस तरह हमारे जीवन में माता-पिता जो हमें जन्म देते हैं,शिक्षक जो हमें शिक्षा देते हैं।उसी प्रकार दोस्त का भी उतना ही बड़ा योगदान है। कभी-कभी हमारे साथ कुछ ऐसा होता है,जो हम अपने माता-पिता को नहीं बताते या तो उनके डर के कारण या और कोई वजह के कारण।हम उन्हें नहीं बता पाते। लेकिन दोस्त एक ऐसा शख्स है, जिसे हम सब कुछ बताते हैं। क्योंकि वह हमारे उम्र का होता है।हमारे बराबरी का होता है।जो खुद उस दौर में जी रहा होता है। लेकिन कोई जरूरी नहीं कि एक लड़के का अच्छा और सच्चा दोस्त कोई लड़का ही हो और कोई लड़की की अच्छी और सच्ची दोस्त एक लड़की ही हो। ऐसा भी हो सकता है कि कोई लड़का का अच्छा दोस्त कोई लड़की हो और कोई लड़की का लड़का हो।लेकिन जैसे ही ऐसी दोस्ती होती है,तो समाज में इसे गलत समझते हैं।लोग समझते हैं कि वह बिगड़ गया है या बिगड़ गई है।लोग समझते हैं कि वह एक दूसरे से प्यार करते हैं और अनेक तरह के बातें सोचते हैं। लेकिन उन दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं होता है।कभी-कभी अगर कोई लड़का ही दोस्त हो और वह बहुत अच्छा सच्चा और अपनी दोस्ती भी ईमानदारी से निभा रहा हो।लेकिन जब उसे अपने दोस्त की जरूरत हो तो वह उसके साथ ना रहे तो लोग सीधा समझते हैं कि वह धोखेबाज है। वह उसे बुरा भला कह कर दोस्ती में दरार डाल देते हैं।बल्कि ऐसा भी तो हो सकता है कि उसके साथ भी कोई बड़ी मजबूरी रही होगी।क्योंकि कोई जरूरी नहीं की हर काम को कोई इंसान कर ही सकता है।दो दोस्तो के बीच में भरोसा होना चाहिए।उन्हें अपनी दोस्ती पर विश्वास होनी चाहिए। उसके बाद कोई कुछ भी बोले अगर भरोसा है तो कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। दोस्ती कोई गलत या कोई खराब चीज नहीं है।वह आप पर निर्भर करता है कि आप दोस्तों के साथ रहकर कैसा बनते हैं। कई लोग दोस्तों के साथ रहकर,दोस्तों के बदौलत कामयाबी भी हासिल कर लेते हैं। तो कई लोग दोस्तों के कारण कारागार भी जाते हैं (मतलब बुरे काम में भी चले जाते हैं )।सब कुछ हम खुद पर निर्भर करता है कि हम किस राह पर जाना चाहते हैं।कोयला बनने की राह पर या हीरा बनने की राह पर।क्योंकि दोनों एक ही खदान में मिलता है। अभी के समय में तो सभी के पास दोस्त होते हैं।चाहे लड़का,चाहे लड़की,चाहे जैसा भी दोस्त हो सब रखते हैं।तो अगर दोस्त रखना जानते हैं,तो दोस्ती निभाना भी जानना चाहिए। बरना दोस्त का कोई फायदा या कोई मतलब नहीं।
Good content
ReplyDeletewow so nice
ReplyDeleteVery nice 👍🙂
ReplyDeleteWe have many friends but we have only one true friend who always stays with us in your bad times.
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