Dashrath Manjhi (दशरथ माँझी) The Mountain Man
Dashrath Manjhi (दशरथ माँझी) The Mountain Man

शाहजहां ने जो ताज महल बनाया, उसके बारे में तो सभी लोग जानते हैं। क्योंकि शाहजहां के पास दौलत, हुकूमत सब था। शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया। क्योंकि शाहजहां एक बड़े और नामी बादशाह थे। जिसके कारण आज सब लोग उनके कर्मों से परिचित है। परंतु कई ऐसे छिपे हुए शख्सियत हैं। जिन्होंने भी अपनी पत्नी(बेगम) के लिए बहुत कुछ किया। परंतु दुनिया उन्हें नहीं जानती। क्योंकि उनके पास शाहजहां जितना दौलत या हुकूमत नहीं था।
वह शख्स हैं दशरथ माँझी जिनका जन्म 1934 गेहलौर गांव (बिहार) में हुआ था। हालांकि उनका पिछड़े जाति से तालुकात था। इसलिए उनके कर्मों से बहुत ही कम लोग परिचित हैं। वह भी अपनी पत्नी से उतना ही मोहब्बत करते थे, जितना कि शाहजहां। परंतु उनके पास उतना दौलत या हुकूमत तो नहीं था कि ताजमहल जैसी इमारत बनवा सकें। फिर भी उन्होंने जो अपनी पत्नी के लिए किया। वो शायद ही अभी के समय में कोई पति करेगा। उन्होंने अपनी पत्नी के लिए एक पहाड़ को काटकर रास्ता बना दिया।
दशरथ मांझी और उनकी पत्नी फाल्गुनी देवी दोनों पति-पत्नी अपने वैवाहिक जीवन को खुशी से व्यतीत कर रहे थे। दशरथ माँझी गहलौर गांव के रहने वाले थे। तो उनकी पत्नी फाल्गुनी देवी भी उनके साथ उसी गांव में रहती थी। माँझी कड़ी मेहनत कर पैसे कमाते और दोनों खुशी से रहते। कुछ समय बीते दोनों का जीवन खुशी पूर्वक बीत रहा था। परंतु कहा जाता है कि जिंदगी हमेशा एक जैसी नहीं रहती ठीक उसी प्रकार मांझी की हरी-भरी जीवन में भी एक ऐसा समय आया जो उसके सभी सुखों
को गम में बदल दिया। उसकी पत्नी फाल्गुनी देवी के साथ एक हादसा हुआ। जिसमें फाल्गुनी देवी की मौत हो गई। उस मौत का कारण बना पहाड़ जिसकी वजह से दशरथ मांझी अपनी पत्नी फाल्गुनी देवी को लेकर समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके क्योंकि गांव से कस्बे का अस्पताल का जो रास्ता था। वह कई घंटों का था तकरीबन 55 किलोमीटर की दूरी थी गांव से कस्बे की अस्पताल की और यह पहाड़ी और घुमावदार रास्ता था। दशरथ मांझी पर तो जैसे गमों का पहाड़ ही टूट गया। लेकिन उसने कसम खाई कि मुझ पर गमों का पहाड़ टूटा है। लेकिन मैं इस पहाड़ को ही तोड़ दूंगा, इस पहाड़ को मैं चीर दूंगा। उसने कसम खाई कि आज मेरी पत्नी जुदा हुई है, इस पहाड़ की वजह से लेकिन अब किसी और की पत्नी को मैं जुदा नहीं होने दूंगा इस पहाड़ की वजह से।
एक छैनी और एक हथौड़ी लेकर दशरथ मांझी ने पहाड़ को चीर ना शुरू कर दिया। शुरू में लोग उस पर हंसते उसे पागल कहते थे। लेकिन धीरे-धीरे जब लोग दशरथ मांझी का हिम्मत और हौसला देखें तो साथ भी देने लगे। 1नहीं, 2नहीं, 5नहीं, 10 नहीं, 15 नहीं बल्कि पूरे 22 साल तक एक छैनी हथौड़ी लेकर लगातार उस पहाड़ को काटता रहा।
1छैनी, 1हथौड़ी उसका हौसला और उसकी पत्नी का याद।
पहाड़ को काटकर उसने 360 फीट लंबी, 30 फीट चौड़ी और 25 फीट ऊंचा रास्ता बना दिया। उन्होंने एक सुरक्षित (सरकार द्वारा संरक्षित) पहाड़ को काटा जो कि भारतीय वन्य जीवन अधिनियम के तहत भारतीय कानून के तहत गलत था। लेकिन उनके प्रयास को सराहा भी गया। क्योंकि उन्होंने इस रास्ते को बनाकर हजारों लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी थी। उनके इस प्रयास ने 55 किलोमीटर की दूरी को 15 किलोमीटर की दूरी में बदल दिया उनके इस प्रयास ने कई घंटों की दूरी को मिनटों की दूरी में बदल दिया।
जिस तरह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल बना कर उसे अमर कर दिया ठीक उसी प्रकार दशरथ मांझी भी अपनी पत्नी फाल्गुनी देवी की याद में 22 साल की कठिन मेहनत के बाद पहाड़ चीर कर जो रास्ता बनाया वह भी काबिले तारीफ है। ऐसा कर के उन्होंने भी अपनी पत्नी को अमर कर दिया।
लेकिन ताजमहल का जिक्र हर महफिल में होता है। परंतु इस रास्ते का जिक्र शायद ही कहीं होता है।
क्या इसलिए कि दशरथ मांझी करीब थे?
क्या इसलिए कि दशरथ मांझी बिहार के एक छोटे से कस्बे के थे?
क्या इसलिए उसने जो किया इतना खूबसूरत नहीं था जितना कि ताजमहल?
मैं शाहजहां और ताजमहल को सलाम करता हूं। लेकिन दशरथ मांझी ने जो एक छैनी, एक हाथी के दम पर 22 साल की मेहनत के बाद जो रास्ता बनाया वह ताजमहल से कहीं ज्यादा है।
तो मेरा आप सभी से गुजारिश है कि त्याग बलिदान किसी अमीर का हो या किसी गरीब का उसे याद रखा जाए।
गरीब की मोहब्बत चर्चाओं के लिए तरस रही है,
आमिर की मोहब्बत कोसों दूर से चमक रही है।
Deshrath Manjhi (दशरथ माँझी)
Born :- 1934, Gehlor (Bihar)
Died :- 17 August, 2007 (AIIMS, New Delhi)
Wife :- Falguni Devi
Children :- Bhagirath Manjhi
Other name :- Mountain Man
A big salute to Mountain Man




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